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ब्रह्मचर्य है जिनकी पहचान,ऐसे महावीर हनुमान का हम गुणगान करते हैं!!!!!!!!#बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम की #अध्यक्ष #श्रीमती #वनिता_कासनियां #पंजाब #संगरिया #राजस्थानजब भगवान अवतार धारण करते हैं, तब वे अकेले ही प्रकट नहीं होते हैं; उनके साथ अनेक देवतागण भी अपने अंशरूप में अवतरित होते हैं । जब पृथ्वी पर रावण (जिसका अर्थ है संसार को रुलाने वाला) का आतंक छा गया, सर्वत्र त्राहि-त्राहि मच गयी, तब भगवान श्रीराम ने सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के संहार के लिए अवतार धारण किया । उस समय अनेक देवतागण वानरों और भालुओं के रूप में प्रकट हुए थे । कैलासपति भगवान शंकर ने समाधिवस्था में श्रीराम के अवतार धारण करने का संकल्प जान लिया । भगवान रुद्र (शंकर) भी अपने आराध्य की सेवा करने तथा कठिन कलिकाल में भक्तों की रक्षा करने की इच्छा से श्रीराम के प्रमुख सेवक के रूप में अवतरित हुए । जेहि शरीर रति राम सों सोइ आदरहिं सुजान ।रुद्रदेह तजि नेहबस बानर भे हनुमान ।। (दोहावली १४२)भगवान शंकर ने यह अवतार बिना शक्ति (पार्वती) के अकेले ही धारण किया, इसलिए नैष्ठिक ब्रह्मचर्य इस अवतार का मुख्य लक्षण है । ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करके हनुमानजी ने मानव समाज के सामने आचरण सम्बन्धी महान आदर्श प्रस्तुत किया है । हनुमानजी ने जिस समाज में जन्म लिया, उसमें बहुपत्नी-प्रथा थी। हनुमानजी का जन्मसिद्ध ब्रह्मचर्य का गुण किसी न्यूनता या अयोग्यता के कारण नहीं था । वे चाहते तो भोगविलासमय जीवन व्यतीत कर सकते थे लेकिन वे जन्म से ही इस प्रकार के जीवन से दूर रहे ।मतवाले हाथी या खूंखार शेरों पर विजय पाने वाला मनुष्य ‘वीर’ कहलाता है किन्तु मन को जीतकर काम पर विजय पाने वाला मनुष्य ‘महावीर’ होता है । आजन्म ब्रह्मचर्य-व्रत के कारण ही हनुमानजी महावीर कहलाते हैं ।प्रभु श्रीराम के प्रमुख व अंतरंग सेवक जैसे अधिकार के पद को संभालते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करना खेल नहीं है, यह बहुत बड़ी तपस्या है । हनुमानजी इस तप में कितने खरे उतरे, यह उनके जीवन की एक घटना से स्पष्ट है—माता सीता की खोज में हनुमानजी ने रात्रि में लंका में प्रवेश किया । उन्हें पता तो था नहीं कि रावण ने जनकनन्दिनी को कहां रखा है, अत: वे राक्षसों के घर में घूमते फिरे । वे राक्षसों के अंत:पुर थे, संयमियों के नहीं । सुरापान और उन्मत्त विलास ही राक्षसों के प्रिय व्यसन थे । अपनी उन्मत्त-क्रीडा के बाद राक्षसगण निद्रामग्न हो चुके थे और प्रत्येक घर में अस्त-व्यस्त वस्त्रों में निद्रालीन राक्षस युवतियां हनुमानजी को देखने को मिलीं । हनुमानजी ने कभी सीताजी को देखा तो था नहीं, अत: जिस सुन्दरी स्त्री को देखते तो सोचते, हो-न-हो यही सीता माता हैं, फिर जब उससे बढ़ कर किसी सुन्दर स्त्री को देखते तो उसे सीताजी समझने लगते । कभी उनको लगता—इनमें से यदि कोई भी सीता नहीं तो सीताजी गईं कहां ? सम्पाती की बात झूठ तो हो नहीं सकती । उसने कहा था—‘मैं सीताजी को लंका में बैठे देख रहा हूँ ।’ जानकीजी को ढूंढ़ना है तो स्त्रियां जहां रह सकती हैं, वहीं तो ढूंढ़ना पड़ेगा—यही सोचकर वे फिर सीताजी को खोजने लगते । अब वे रावण के अंत:पुर में पहुंच गए । वहां एक स्वर्णनिर्मित पलंग पर रावण सो रहा था और उसके समीप गलीचों पर सहस्त्रों स्त्रियां सो रही थीं । किसी का सोते समय मुख खुला था, कोई खर्राटे भर रही थी, किसी के मुख से पान की पीक बह रही थी । अस्त-व्यस्त पड़ी ऐसी अवस्था वाली परस्त्री को देखना सद्गृहस्थों के लिए भी बहुत बड़ा दोष है, हनुमानजी तो आजन्म ब्रह्मचारी थे । उनके मन में बड़ी घृणा हुई ।वे सोचने लगे—‘आज मेरा व्रत खण्डित हो गया । ब्रह्मचारी को तो स्त्रियों के चित्र को भी नहीं देखना चाहिए । मैंने अर्धनग्न अवस्था में अचेत पड़ीं इन स्त्रियों को देखा है । इससे मुझे दोष लगा, बड़ा अपराध हुआ है । इसका क्या प्रायश्चित करुँ ? मन में बड़ा पश्चात्ताप, ग्लानि और अत्यन्त दु:ख हो रहा है ।’ जिसने कोई व्रत, कोई नियम दीर्घकाल तक पालन किया हो, उससे अनजाने में वह नियम टूट जाए, तो व्रत-भंग की वेदना क्या होती है इसका अनुमान लगाना आम मनुष्य के लिए सम्भव नहीं है ।‘मैं मरणान्त प्रायश्चित करुंगा’—हनुमानजी ने मन में संकल्प किया ।कोई अनर्थ हो, वे कुछ कर बैठें, इससे पहले ही जैसे हृदय में आराध्य के हस्तकमल का प्रकाश हुआ । रघुवंशशिरोमणि श्रीराम अपने भक्तों, आश्रितों की सदा रक्षा करते हैं । हनुमानजी की अंतरात्मा की आवाज आई—‘माता सीता स्त्रियों में ही मिलेंगी, इसी भावना से मैंने रावण के अंत:पुर में प्रवेश किया था । मैं तो माता जानकी को ढूंढ़ रहा था, किसी नारी के सौन्दर्य पर तो मेरी दृष्टि नहीं गई और ना ही मेरे मन में कोई विकार आया । ये जो स्त्रियों के अर्धनग्न देह मुझे देखने पड़े, ये तो मेरी दृष्टि में शव के समान ही थे, फिर मेरा अखण्ड ब्रह्मचर्य का व्रत कैसे भंग हो सकता है ?’‘व्रत का मूल मन है, देह नहीं । अपना अंत:करण ही पुरुष का साक्षी होता है । पाप और पुण्य में भावना ही प्रधान होती है । जब मेरी भावना ही दूषित नहीं हुई, तब प्रायश्चित ही किस बात का ? मैं जिस काम के लिए यहां आया था वह तो पूरा हुआ ही नहीं, मुझे सब काम छोड़कर सीताजी को खोजना चाहिए ।’ यह सोचकर ब्रह्मचर्य का मूर्तिमान रूप हनुमानजी दूसरी जगह सीताजी को खोजने लगे ।‘जहां काम तहँ राम नहिं, जहां राम नहिं काम’ अर्थात् जिसके मन में काम भावना होती है वह श्रीराम की उपासना नहीं कर सकता और जो श्रीराम को भजता है, वहां काम ठहर नहीं सकता । हनुमानजी के तो रोम-रोम में राम बसे हैं और वे सारे संसार को ‘सीयराममय’ देखते थे, इसीलिए हनुमानजी को आजन्म ब्रह्मचर्य का पालन करना असम्भव नहीं था । हनुमानजी के अखण्ड ब्रह्मचर्यव्रत में कोई त्रुटि नहीं आई। उनके मन में जो पश्चात्ताप जगा था, वह ब्रह्मचर्य-व्रत के प्रति उनकी प्रबल निष्ठा और जागरुकता का सूचक है । इसीलिए वे ‘जितेन्द्रिय’ कहलाते हैं और प्रभु श्रीराम के अंतरंग पार्षद होकर उनकी अष्टयाम-सेवा का सौभाग्य भी उन्हें ही प्राप्त हुआ है और माता सीता के अजर-अमर रहने के आशीर्वाद से ही सप्त चिरंजीवियों में उनका नाम है ।संसार में ब्रह्मचर्य एक ऐसी तपस्या है, जिसको सिद्ध कर लेने पर मनुष्य में अनेक दिव्य और दुर्लभ गुण आ जाते हैं और जिसके बल पर मनुष्य महान-से-महान कार्य कर सकता है । सच्चे ब्रह्मचारी के लिए कोई भी बात असम्भव नहीं होती है । हनुमानजी ब्रह्मचारियों में अग्रग्रण्य हैं । हनुमानजी का आजन्म नैष्ठिक ब्रह्मचर्य-पालन का आदर्श अद्वितीय है इसीलिए वे ‘सकलगुणनिधान’ हैं ।अंजनीगर्भसम्भूतो वायुपुत्रो महाबल:।कुमारो ब्रह्मचारी च हनुमन्ताय नमो नम:।आज देश में नवयुवकों में जो चारित्रिक पतन देखने को मिल रहा है उसका उत्तर स्वामी विवेकानन्द के शब्दों में है—‘देश के उद्धार के लिए श्रीराम और हनुमानजी की उपासना जोरों से प्रचलित की जानी चाहिए ।’ क्योंकि हनुमानजी की उपासना से भक्तों में भी उनके गुण प्रकट होने लगते हैं ।

ब्रह्मचर्य है जिनकी पहचान,ऐसे महावीर हनुमान का हम गुणगान करते हैं!!!!!!!!

#बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम की #अध्यक्ष #श्रीमती #वनिता_कासनियां #पंजाब #संगरिया #राजस्थान

जब भगवान अवतार धारण करते हैं, तब वे अकेले ही प्रकट नहीं होते हैं; उनके साथ अनेक देवतागण भी अपने अंशरूप में अवतरित होते हैं । जब पृथ्वी पर रावण (जिसका अर्थ है संसार को रुलाने वाला) का आतंक छा गया, सर्वत्र त्राहि-त्राहि मच गयी, तब भगवान श्रीराम ने सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के संहार के लिए अवतार धारण किया । उस समय अनेक देवतागण वानरों और भालुओं के रूप में प्रकट हुए थे । 

कैलासपति भगवान शंकर ने समाधिवस्था में श्रीराम के अवतार धारण करने का संकल्प जान लिया । भगवान रुद्र (शंकर) भी अपने आराध्य की सेवा करने तथा कठिन कलिकाल में भक्तों की रक्षा करने की इच्छा से श्रीराम के प्रमुख सेवक के रूप में अवतरित हुए । 

जेहि शरीर रति राम सों सोइ आदरहिं सुजान ।
रुद्रदेह तजि नेहबस बानर भे हनुमान ।। (दोहावली १४२)

भगवान शंकर ने यह अवतार बिना शक्ति (पार्वती) के अकेले ही धारण किया, इसलिए नैष्ठिक ब्रह्मचर्य इस अवतार का मुख्य लक्षण है । ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करके हनुमानजी ने मानव समाज के सामने आचरण सम्बन्धी महान आदर्श प्रस्तुत किया है । हनुमानजी ने जिस समाज में जन्म लिया, उसमें बहुपत्नी-प्रथा थी।

 हनुमानजी का जन्मसिद्ध ब्रह्मचर्य का गुण किसी न्यूनता या अयोग्यता के कारण नहीं था । वे चाहते तो भोगविलासमय जीवन व्यतीत कर सकते थे लेकिन वे जन्म से ही इस प्रकार के जीवन से दूर रहे ।

मतवाले हाथी या खूंखार शेरों पर विजय पाने वाला मनुष्य ‘वीर’ कहलाता है किन्तु मन को जीतकर काम पर विजय पाने वाला मनुष्य ‘महावीर’ होता है । आजन्म ब्रह्मचर्य-व्रत के कारण ही हनुमानजी महावीर कहलाते हैं ।

प्रभु श्रीराम के प्रमुख व अंतरंग सेवक जैसे अधिकार के पद को संभालते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करना खेल नहीं है, यह बहुत बड़ी तपस्या है । हनुमानजी इस तप में कितने खरे उतरे, यह उनके जीवन की एक घटना से स्पष्ट है—

माता सीता की खोज में हनुमानजी ने रात्रि में लंका में प्रवेश किया । उन्हें पता तो था नहीं कि रावण ने जनकनन्दिनी को कहां रखा है, अत: वे राक्षसों के घर में घूमते फिरे । वे राक्षसों के अंत:पुर थे, संयमियों के नहीं । सुरापान और उन्मत्त विलास ही राक्षसों के प्रिय व्यसन थे । अपनी उन्मत्त-क्रीडा के बाद राक्षसगण निद्रामग्न हो चुके थे और प्रत्येक घर में अस्त-व्यस्त वस्त्रों में निद्रालीन राक्षस युवतियां हनुमानजी को देखने को मिलीं । 

हनुमानजी ने कभी सीताजी को देखा तो था नहीं, अत: जिस सुन्दरी स्त्री को देखते तो सोचते, हो-न-हो यही सीता माता हैं, फिर जब उससे बढ़ कर किसी सुन्दर स्त्री को देखते तो उसे सीताजी समझने लगते । कभी उनको लगता—इनमें से यदि कोई भी सीता नहीं तो सीताजी गईं कहां ? सम्पाती की बात झूठ तो हो नहीं सकती । उसने कहा था—‘मैं सीताजी को लंका में बैठे देख रहा हूँ ।’ 

जानकीजी को ढूंढ़ना है तो स्त्रियां जहां रह सकती हैं, वहीं तो ढूंढ़ना पड़ेगा—यही सोचकर वे फिर सीताजी को खोजने लगते । अब वे रावण के अंत:पुर में पहुंच गए । वहां एक स्वर्णनिर्मित पलंग पर रावण सो रहा था और उसके समीप गलीचों पर सहस्त्रों स्त्रियां सो रही थीं । किसी का सोते समय मुख खुला था, कोई खर्राटे भर रही थी, किसी के मुख से पान की पीक बह रही थी । अस्त-व्यस्त पड़ी ऐसी अवस्था वाली परस्त्री को देखना सद्गृहस्थों के लिए भी बहुत बड़ा दोष है, हनुमानजी तो आजन्म ब्रह्मचारी थे । उनके मन में बड़ी घृणा हुई ।

वे सोचने लगे—‘आज मेरा व्रत खण्डित हो गया । ब्रह्मचारी को तो स्त्रियों के चित्र को भी नहीं देखना चाहिए । मैंने अर्धनग्न अवस्था में अचेत पड़ीं इन स्त्रियों को देखा है । इससे मुझे दोष लगा, बड़ा अपराध हुआ है । इसका क्या प्रायश्चित करुँ ? मन में बड़ा पश्चात्ताप, ग्लानि और अत्यन्त दु:ख हो रहा है ।’ 

जिसने कोई व्रत, कोई नियम दीर्घकाल तक पालन किया हो, उससे अनजाने में वह नियम टूट जाए, तो व्रत-भंग की वेदना क्या होती है इसका अनुमान लगाना आम मनुष्य के लिए सम्भव नहीं है ।

‘मैं मरणान्त प्रायश्चित करुंगा’—हनुमानजी ने मन में संकल्प किया ।

कोई अनर्थ हो, वे कुछ कर बैठें, इससे पहले ही जैसे हृदय में आराध्य के हस्तकमल का प्रकाश हुआ । रघुवंशशिरोमणि श्रीराम अपने भक्तों, आश्रितों की सदा रक्षा करते हैं । हनुमानजी की अंतरात्मा की आवाज आई—

‘माता सीता स्त्रियों में ही मिलेंगी, इसी भावना से मैंने रावण के अंत:पुर में प्रवेश किया था । मैं तो माता जानकी को ढूंढ़ रहा था, किसी नारी के सौन्दर्य पर तो मेरी दृष्टि नहीं गई और ना ही मेरे मन में कोई विकार आया । ये जो स्त्रियों के अर्धनग्न देह मुझे देखने पड़े, ये तो मेरी दृष्टि में शव के समान ही थे, फिर मेरा अखण्ड ब्रह्मचर्य का व्रत कैसे भंग हो सकता है ?’

‘व्रत का मूल मन है, देह नहीं । अपना अंत:करण ही पुरुष का साक्षी होता है । पाप और पुण्य में भावना ही प्रधान होती है । जब मेरी भावना ही दूषित नहीं हुई, तब प्रायश्चित ही किस बात का ? मैं जिस काम के लिए यहां आया था वह तो पूरा हुआ ही नहीं, मुझे सब काम छोड़कर सीताजी को खोजना चाहिए ।’ 

यह सोचकर ब्रह्मचर्य का मूर्तिमान रूप हनुमानजी दूसरी जगह सीताजी को खोजने लगे ।

‘जहां काम तहँ राम नहिं, जहां राम नहिं काम’ अर्थात् जिसके मन में काम भावना होती है वह श्रीराम की उपासना नहीं कर सकता और जो श्रीराम को भजता है, वहां काम ठहर नहीं सकता । हनुमानजी के तो रोम-रोम में राम बसे हैं और वे सारे संसार को ‘सीयराममय’ देखते थे, इसीलिए हनुमानजी को आजन्म ब्रह्मचर्य का पालन करना असम्भव नहीं था । हनुमानजी के अखण्ड ब्रह्मचर्यव्रत में कोई त्रुटि नहीं आई।

 उनके मन में जो पश्चात्ताप जगा था, वह ब्रह्मचर्य-व्रत के प्रति उनकी प्रबल निष्ठा और जागरुकता का सूचक है । इसीलिए वे ‘जितेन्द्रिय’ कहलाते हैं और प्रभु श्रीराम के अंतरंग पार्षद होकर उनकी अष्टयाम-सेवा का सौभाग्य भी उन्हें ही प्राप्त हुआ है और माता सीता के अजर-अमर रहने के आशीर्वाद से ही सप्त चिरंजीवियों में उनका नाम है ।

संसार में ब्रह्मचर्य एक ऐसी तपस्या है, जिसको सिद्ध कर लेने पर मनुष्य में अनेक दिव्य और दुर्लभ गुण आ जाते हैं और जिसके बल पर मनुष्य महान-से-महान कार्य कर सकता है । सच्चे ब्रह्मचारी के लिए कोई भी बात असम्भव नहीं होती है । हनुमानजी ब्रह्मचारियों में अग्रग्रण्य हैं । हनुमानजी का आजन्म नैष्ठिक ब्रह्मचर्य-पालन का आदर्श अद्वितीय है इसीलिए वे ‘सकलगुणनिधान’ हैं ।

अंजनीगर्भसम्भूतो वायुपुत्रो महाबल:।
कुमारो ब्रह्मचारी च हनुमन्ताय नमो नम:।

आज देश में नवयुवकों में जो चारित्रिक पतन देखने को मिल रहा है उसका उत्तर स्वामी विवेकानन्द के शब्दों में है—‘देश के उद्धार के लिए श्रीराम और हनुमानजी की उपासना जोरों से प्रचलित की जानी चाहिए ।’ क्योंकि हनुमानजी की उपासना से भक्तों में भी उनके गुण प्रकट होने लगते हैं ।

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हैं-📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍1- बुराई का होता है विनाश,दशहरा लाता है उम्मीद की आस।रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍2- संकटों का तम घनेरा,हो न आकुल मन ये तेरा।संकटों के तम छटेंगे होगा फिर सुंदर सवेरा,मुबारक हो आपको दशहरा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍3- रावण की तरहमन के विकारों का नाश हो,प्रभु श्रीराम का हृदय मेंसर्वदा वास हो।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍4- ज्योत से ज्योत जगाते चलोप्रेम की गंगा बहाते चलोराह में आए जो दीन दुखीसबको गले लगाते चलोदिन आएगा सबका सुनहरामेरी तरफ से शुभ दशहरा📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍5- कभी भी आप पर पड़े न दुख का साया,प्रभु राम की कृपा का ऐसा असर रहे छाया,हरदम धन धान्य रहे आप अंगना,इस विजयादशमी यही है हमारी मनोकामना।शुभ विजयादशमी📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍फूलों की खुशबू अपनों का प्यार, मुबारक हो आपको विजयादशमी का त्योहार…चांद की चांदनी शरद की बहार,फूलों की खुशबू अपनों का प्यार,मुबारक हो आपको विजयादशमी का त्योहार,सदा खुश रहे आप और आपका परिवार📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दे बेशुमार खुशियां यह दशहरा आपको, हर प्यारी खुशी आपकी दीवानी हो जाए!आज की नई सुबह बेहद सुहानी हो जाए,दुखों की सारी कड़वाहट पुरानी हो जाए,दे बेशुमार खुशियां यह दशहरा आपको,हर प्यारी खुशी आपकी दीवानी हो जाए!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍खुशी आप के कदम चूमे, कभी ना हो दुखों का सामना…खुशी आप के कदम चूमे,कभी ना हो दुखों का सामना…धन ही धन आए आपके आंगन में,दशहरा के शुभ अवसर पर हमारी है यही मनोकामना,विजयदशमी की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍हैप्पी दशहरा 2021आपके जीवन में कभी-भी कोई गम ना आएआपको दशहरा की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं,हैप्पी दशहरा 2021📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍अत्याचार मिटाने के लिए अब हर घर से एक राम निकलेगाअन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैरावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैभ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगाअब हर घर से एक राम निकलेगामंगलमय हो दशहरा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!दशहरा एक उम्मीद जगाता है,बुराई के अंत की याद दिलाता है,जो चलता है सत्य की राह परवो विजय का प्रतीक बन जाता हैंदशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएंसत्य स्थापित करके, इस देश से बुराई को मिटाना होगा,आतंकी रावण का दहन करने आज फिर राम को आना होगा,आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍अधर्म पर धर्म की 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की राह पर चलकर हार है निश्चितइस संदेश को करो अपने जीवन में शामिलदशहरा पर्व की शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍बुरे पर अच्छे की जय जयकार…धर्म पर धर्म की जीत, अन्याय पर न्याय की विजयबुरे पर अच्छे की जय जयकार, यही है दशहरा का त्योहार।👭👭👭👭👭👭👭👭👭👭👭इस दशहरे हर मनुष्य बस एक नेक काम करें…इस दशहरे हर मनुष्य बस एक नेक काम करेंअंतर्मन में पनप रही हर बुराई का सर्वनाश करेंइसी कामना के साथ आपको दशहरे की शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍 14 Oct 2021आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएंसत्य स्थापित करके, इस देश से बुराई को मिटाना होगाआतंकी रावण का दहन करने आज फिर राम को आना होगाआपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍आपको दशहरा की ढेरों सारी शुभ कामनाएं…आपके जीवन में कभी-भी कोई गम ना आएआपको दशहरा की ढेरों सारी शुभ कामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍Happy Dussehra 2021 Wishes: दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएंइससे पहले की दशहरे की शाम हो जाए,मेरा मैसेज औरों की तरह आम हो जाए,सारे मोबाइल नेटवर्क जाम हो जाएं,और दशहरा विश करना आम हो जाए📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍*बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब*आप सभी को Happy Vijayadashamतीन लोग आपका नंबर मांग रहे हैं, मैंने नहीं दिया.वो दशहरा के दिन आयेंगे उनके नाम हैं…सुख..!!शांति..!!समृधि..!!हैप्पी विजयदशमी।विजयदशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीरामबुराई पर अच्छाई का प्रतीक हैं श्री रामदशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍

मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयदशमी भी कहा जाता है। 📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍 *बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संगरिया की टीम की तरफ से सभी को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं* 📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍 : बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है दशहरा शारदीय नवरात्रि के नौ दिन समाप्त होने के बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। दशहरा का यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयादशमी भी कहा जाता है। इस साल 15 अक्टूबर को यह त्योहार मनाया जाएगा। 📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍 दशहरे के दिन जगह-जगह पर मेले का आयोजन होता है, साथ ही रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले फूंके जाते हैं। असत्य पर सत्य की जीत के इस प्रतीक के दिन लोग अपने मित्रों, परिजनों और रिश्तेदारों को संदेश भेजकर शुभकामनाएं देते हैं। आप भी इन संदेशों के...

* बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड भारत सरकार द्वारा रजिस्ट्रेशन नंबर 202103419400050 का कार्यक्षेत्र संपूर्ण भारत आराजनैतिक संगठन है* (आए जुडे देश के हित के लिए) बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड संगठन से जुडने हेतु व्हाट्सएप करे। मोबाइल न० 9877264170 बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड का नीतिगत परिचयमहिला/पुरुष जुड़े ----का सदस्यता अभियान भारतवर्ष के सभी प्रदेशो,संभाग, जिलो,विधानसभा क्षेत्र, तहसील, स्तर पर जोर शोर से चलाया जा रहा है समाज के हितों के लिए आज ही हमसे जुड़े एक फोटो व आधार कार्ड की फ़ोटो हमे वाट्सप नम्बर पर सेन्ड कर दे।उपरोक्त जानकारी हम इसलिए माँग रहे हैं क्योंकि आपको मनोनयन पत्र देते समय आपकी details उसमे भरी जाती है ।हमारे मुख्य उद्देश्य👇👇👇👇👇👇👇👇👇🙏🏻 भारत सरकार द्वारा बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड संगठन है 🙏 बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट कानून केंद्र सरकार द्वारा संपूर्ण भारत में लागू करवाना1: देश में बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट सुरक्षा कानून लागू किया जाए2: देश के बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट को आयुष्मान कार्ड दिया जाए3: देशभर में बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट का टोल टैक्स फ्री किया जाए4: बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट के अच्छे बर्ताव रखने हेतु पुलिस को निर्देश जारी किया जाए5: ट्रस्ट संस्था पर लिखे गए फर्जी मुकदमों को वापस लिया जाए6: ट्रस्ट या संस्था पर मुकदमा लिखे जाने से पहले जिलाधिकारी से अनुमति लेने का प्रावधान बनाया जाए👍👍👍👍सभी साथी ध्यान दें यह सभी कानून 1 दिन में नहीं होंगे लेकिन हम सभी साथियों की एकता से एक दिन जरूर होंगे👍👍👍👍ट्रस्ट सुरक्षा परिषद फाउंडेशन रजिस्टर्ड के मुख्य उद्देश्य (1) रेप ,दहेज,कन्या भ्रूण हत्या,भ्रष्टाचार, इन घिनोने क्रत्य को जड़ से उखाड़ फेकना।(2)समाज के भारतीय बालाक एव बालिकाओ हेतु सिलाई कढाई ।(3)सामाज में व्यापत छुआ छूत ऊॅच नीच तथा जाति धर्म की वशमता को सामप्त के लिए व्यापक प्रचार व प्रसार करना (4)अधिकारों की जानकारी देना व विधिक सहायता के लिए शिविरो का आयोजन करना ।(5)समाज को साक्षर बनाने के लिए सर्वशिक्षा , शिक्षा गारन्टी योजना के बारे में लोगो का ज्ञान कराना व बौद्धक शिक्षा का ज्ञान कखना (6)शारीरिक तथा मानसिक रूप से अक्ष्म व्यक्तियो हेतु कल्याणकारी कार्यो का सम्पादन करना तथा इन लोगो के रहने के लिए निशुल्क आश्रम बनाना (7)संस्था के माध्यम से समस्त भारतीय के बालक एव बालिकओं हेतु शिक्षा के साथ साथ सरकार से अनुमति लेकर तकनीकि शिक्षा का ज्ञान करवाना व औद्योगिक क्षेत्र में विकास के कार्यो को करना ।{9}शाराब मादक पदार्थो का सेवन करने वालों की लत छुडाने के लिए सरकार के कार्यक्रमों के अनुसार नशा उन्मूलन एवं पुर्नवास केंद्र स्थापित करना व अवैध रूप से बिक रही शराब को बन्द करवाना(10)दहेज प्रथा अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का प्रयास करना (11)निर्धन तथा कमजोर वर्ग की बालिकाओं के लिए निशुल्क छात्रावास वाचानलय ।(12)आम जनता के उपयोग के लिए धमार्थ कम्प्यूनिटी हाल ,बरातघर, वृद्धआश्रम, बालआश्रम महिला आश्रम,अनाथालय, प्याऊ,धर्माथ डिस्पेन्सरीव,निःशुल्क स्टुडियो, रात्रि निवास,मूकबधिरो के कल्याण हेतु समरत कायक को प्रचार व प्रसार करना ।(13) कोई भी महिला अगर किसी भी समस्या या किसी से परेशान हे तो हमारी संस्था उसे 24, घन्टे के अन्दर महिला की समस्या का निराकरण करवाएगी ।और भी कई मुद्दे जिस पर हमारी संस्था काम करेगी 🙏🏻आई जुड़े देश हित के लिए 🙏🏻👩🏻‍⚕बहन बिटियो के सम्मान में बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संस्था रजिस्टर मैदान में राष्ट्रीय अध्यक्षवनिता कासनियां पंजाब

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, हाल दिल का तुझसे केह दिया तेरा काम जाने, मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने रंग दुनिया के मैं न समज पाती हु हस के माया में तेरी उलज जाती हु कैसे रखता है तू सब पे लगाम जाने मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने तुझको मंजूर जो जग में होता वही राज गेहरा हो कितना वो छुपता नही सिवा तेरे न किसी का कोई अंजाम जाने मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने छोड़ा जग तो प्रबु तेरा दर मिल गया इस दास को चरणों में घर मिल गया कैसे रखे गा तू भगतो का समान जाने मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने by समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब,