सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

* बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड भारत सरकार द्वारा रजिस्ट्रेशन नंबर 202103419400050 का कार्यक्षेत्र संपूर्ण भारत आराजनैतिक संगठन है* (आए जुडे देश के हित के लिए) बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड संगठन से जुडने हेतु व्हाट्सएप करे। मोबाइल न० 9877264170 बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड का नीतिगत परिचयमहिला/पुरुष जुड़े ----का सदस्यता अभियान भारतवर्ष के सभी प्रदेशो,संभाग, जिलो,विधानसभा क्षेत्र, तहसील, स्तर पर जोर शोर से चलाया जा रहा है समाज के हितों के लिए आज ही हमसे जुड़े एक फोटो व आधार कार्ड की फ़ोटो हमे वाट्सप नम्बर पर सेन्ड कर दे।उपरोक्त जानकारी हम इसलिए माँग रहे हैं क्योंकि आपको मनोनयन पत्र देते समय आपकी details उसमे भरी जाती है ।हमारे मुख्य उद्देश्य👇👇👇👇👇👇👇👇👇🙏🏻 भारत सरकार द्वारा बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड संगठन है 🙏 बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट कानून केंद्र सरकार द्वारा संपूर्ण भारत में लागू करवाना1: देश में बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट सुरक्षा कानून लागू किया जाए2: देश के बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट को आयुष्मान कार्ड दिया जाए3: देशभर में बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट का टोल टैक्स फ्री किया जाए4: बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट के अच्छे बर्ताव रखने हेतु पुलिस को निर्देश जारी किया जाए5: ट्रस्ट संस्था पर लिखे गए फर्जी मुकदमों को वापस लिया जाए6: ट्रस्ट या संस्था पर मुकदमा लिखे जाने से पहले जिलाधिकारी से अनुमति लेने का प्रावधान बनाया जाए👍👍👍👍सभी साथी ध्यान दें यह सभी कानून 1 दिन में नहीं होंगे लेकिन हम सभी साथियों की एकता से एक दिन जरूर होंगे👍👍👍👍ट्रस्ट सुरक्षा परिषद फाउंडेशन रजिस्टर्ड के मुख्य उद्देश्य (1) रेप ,दहेज,कन्या भ्रूण हत्या,भ्रष्टाचार, इन घिनोने क्रत्य को जड़ से उखाड़ फेकना।(2)समाज के भारतीय बालाक एव बालिकाओ हेतु सिलाई कढाई ।(3)सामाज में व्यापत छुआ छूत ऊॅच नीच तथा जाति धर्म की वशमता को सामप्त के लिए व्यापक प्रचार व प्रसार करना (4)अधिकारों की जानकारी देना व विधिक सहायता के लिए शिविरो का आयोजन करना ।(5)समाज को साक्षर बनाने के लिए सर्वशिक्षा , शिक्षा गारन्टी योजना के बारे में लोगो का ज्ञान कराना व बौद्धक शिक्षा का ज्ञान कखना (6)शारीरिक तथा मानसिक रूप से अक्ष्म व्यक्तियो हेतु कल्याणकारी कार्यो का सम्पादन करना तथा इन लोगो के रहने के लिए निशुल्क आश्रम बनाना (7)संस्था के माध्यम से समस्त भारतीय के बालक एव बालिकओं हेतु शिक्षा के साथ साथ सरकार से अनुमति लेकर तकनीकि शिक्षा का ज्ञान करवाना व औद्योगिक क्षेत्र में विकास के कार्यो को करना ।{9}शाराब मादक पदार्थो का सेवन करने वालों की लत छुडाने के लिए सरकार के कार्यक्रमों के अनुसार नशा उन्मूलन एवं पुर्नवास केंद्र स्थापित करना व अवैध रूप से बिक रही शराब को बन्द करवाना(10)दहेज प्रथा अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का प्रयास करना (11)निर्धन तथा कमजोर वर्ग की बालिकाओं के लिए निशुल्क छात्रावास वाचानलय ।(12)आम जनता के उपयोग के लिए धमार्थ कम्प्यूनिटी हाल ,बरातघर, वृद्धआश्रम, बालआश्रम महिला आश्रम,अनाथालय, प्याऊ,धर्माथ डिस्पेन्सरीव,निःशुल्क स्टुडियो, रात्रि निवास,मूकबधिरो के कल्याण हेतु समरत कायक को प्रचार व प्रसार करना ।(13) कोई भी महिला अगर किसी भी समस्या या किसी से परेशान हे तो हमारी संस्था उसे 24, घन्टे के अन्दर महिला की समस्या का निराकरण करवाएगी ।और भी कई मुद्दे जिस पर हमारी संस्था काम करेगी 🙏🏻आई जुड़े देश हित के लिए 🙏🏻👩🏻‍⚕बहन बिटियो के सम्मान में बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संस्था रजिस्टर मैदान में राष्ट्रीय अध्यक्षवनिता कासनियां पंजाब

* बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड भारत सरकार द्वारा रजिस्ट्रेशन नंबर 202103419400050 का कार्यक्षेत्र संपूर्ण भारत आराजनैतिक संगठन है* (आए जुडे देश के हित के लिए) बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड संगठन से जुडने हेतु व्हाट्सएप करे। मोबाइल न० 9877264170 बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड का नीतिगत परिचयमहिला/पुरुष जुड़े ----का सदस्यता अभियान भारतवर्ष के सभी प्रदेशो,संभाग, जिलो,विधानसभा क्षेत्र, तहसील, स्तर पर जोर शोर से चलाया जा रहा है समाज के हितों के लिए आज ही हमसे जुड़े एक फोटो व आधार कार्ड की फ़ोटो हमे वाट्सप नम्बर पर सेन्ड कर दे।उपरोक्त जानकारी हम इसलिए माँग रहे हैं क्योंकि आपको मनोनयन पत्र देते समय आपकी details उसमे भरी जाती है ।हमारे मुख्य उद्देश्य👇👇👇👇👇👇👇👇👇🙏🏻 भारत सरकार द्वारा बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड संगठन है 🙏 बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट कानून केंद्र सरकार द्वारा संपूर्ण भारत में लागू करवाना1: देश में बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट सुरक्षा कानून लागू किया जाए2: देश के बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट को आयुष्मान कार्ड दिया जाए3: देशभर में बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट का टोल टैक्स फ्री किया जाए4: बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट के अच्छे बर्ताव रखने हेतु पुलिस को निर्देश जारी किया जाए5: ट्रस्ट संस्था पर लिखे गए फर्जी मुकदमों को वापस लिया जाए6: ट्रस्ट या संस्था पर मुकदमा लिखे जाने से पहले जिलाधिकारी से अनुमति लेने का प्रावधान बनाया जाए👍👍👍👍सभी साथी ध्यान दें यह सभी कानून 1 दिन में नहीं होंगे लेकिन हम सभी साथियों की एकता से एक दिन जरूर होंगे👍👍👍👍ट्रस्ट सुरक्षा परिषद फाउंडेशन रजिस्टर्ड के मुख्य उद्देश्य (1) रेप ,दहेज,कन्या भ्रूण हत्या,भ्रष्टाचार, इन घिनोने क्रत्य को जड़ से उखाड़ फेकना।(2)समाज के भारतीय बालाक एव बालिकाओ हेतु सिलाई कढाई ।(3)सामाज में व्यापत छुआ छूत ऊॅच नीच तथा जाति धर्म की वशमता को सामप्त के लिए व्यापक प्रचार व प्रसार करना (4)अधिकारों की जानकारी देना व विधिक सहायता के लिए शिविरो का आयोजन करना ।(5)समाज को साक्षर बनाने के लिए सर्वशिक्षा , शिक्षा गारन्टी योजना के बारे में लोगो का ज्ञान कराना व बौद्धक शिक्षा का ज्ञान कखना (6)शारीरिक तथा मानसिक रूप से अक्ष्म व्यक्तियो हेतु कल्याणकारी कार्यो का सम्पादन करना तथा इन लोगो के रहने के लिए निशुल्क आश्रम बनाना (7)संस्था के माध्यम से समस्त भारतीय के बालक एव बालिकओं हेतु शिक्षा के साथ साथ सरकार से अनुमति लेकर तकनीकि शिक्षा का ज्ञान करवाना व औद्योगिक क्षेत्र में विकास के कार्यो को करना ।{9}शाराब मादक पदार्थो का सेवन करने वालों की लत छुडाने के लिए सरकार के कार्यक्रमों के अनुसार नशा उन्मूलन एवं पुर्नवास केंद्र स्थापित करना व अवैध रूप से बिक रही शराब को बन्द करवाना(10)दहेज प्रथा अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का प्रयास करना (11)निर्धन तथा कमजोर वर्ग की बालिकाओं के लिए निशुल्क छात्रावास वाचानलय ।(12)आम जनता के उपयोग के लिए धमार्थ कम्प्यूनिटी हाल ,बरातघर, वृद्धआश्रम, बालआश्रम महिला आश्रम,अनाथालय, प्याऊ,धर्माथ डिस्पेन्सरीव,निःशुल्क स्टुडियो, रात्रि निवास,मूकबधिरो के कल्याण हेतु समरत कायक को प्रचार व प्रसार करना ।(13) कोई भी महिला अगर किसी भी समस्या या किसी से परेशान हे तो हमारी संस्था उसे 24, घन्टे के अन्दर महिला की समस्या का निराकरण करवाएगी ।और भी कई मुद्दे जिस पर हमारी संस्था काम करेगी 🙏🏻आई जुड़े देश हित के लिए 🙏🏻👩🏻‍⚕बहन बिटियो के सम्मान में बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संस्था रजिस्टर मैदान में राष्ट्रीय अध्यक्षवनिता कासनियां पंजाब

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयदशमी भी कहा जाता है।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍*बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संगरिया की टीम की तरफ से सभी को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं*📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍: बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है दशहरा शारदीय नवरात्रि के नौ दिन समाप्त होने के बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। दशहरा का यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयादशमी भी कहा जाता है। इस साल 15 अक्टूबर को यह त्योहार मनाया जाएगा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरे के दिन जगह-जगह पर मेले का आयोजन होता है, साथ ही रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले फूंके जाते हैं। असत्य पर सत्य की जीत के इस प्रतीक के दिन लोग अपने मित्रों, परिजनों और रिश्तेदारों को संदेश भेजकर शुभकामनाएं देते हैं। आप भी इन संदेशों के जरिए अपने परिजनों को विश कर सकते हैं-📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍1- बुराई का होता है विनाश,दशहरा लाता है उम्मीद की आस।रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍2- संकटों का तम घनेरा,हो न आकुल मन ये तेरा।संकटों के तम छटेंगे होगा फिर सुंदर सवेरा,मुबारक हो आपको दशहरा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍3- रावण की तरहमन के विकारों का नाश हो,प्रभु श्रीराम का हृदय मेंसर्वदा वास हो।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍4- ज्योत से ज्योत जगाते चलोप्रेम की गंगा बहाते चलोराह में आए जो दीन दुखीसबको गले लगाते चलोदिन आएगा सबका सुनहरामेरी तरफ से शुभ दशहरा📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍5- कभी भी आप पर पड़े न दुख का साया,प्रभु राम की कृपा का ऐसा असर रहे छाया,हरदम धन धान्य रहे आप अंगना,इस विजयादशमी यही है हमारी मनोकामना।शुभ विजयादशमी📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍फूलों की खुशबू अपनों का प्यार, मुबारक हो आपको विजयादशमी का त्योहार…चांद की चांदनी शरद की बहार,फूलों की खुशबू अपनों का प्यार,मुबारक हो आपको विजयादशमी का त्योहार,सदा खुश रहे आप और आपका परिवार📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दे बेशुमार खुशियां यह दशहरा आपको, हर प्यारी खुशी आपकी दीवानी हो जाए!आज की नई सुबह बेहद सुहानी हो जाए,दुखों की सारी कड़वाहट पुरानी हो जाए,दे बेशुमार खुशियां यह दशहरा आपको,हर प्यारी खुशी आपकी दीवानी हो जाए!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍खुशी आप के कदम चूमे, कभी ना हो दुखों का सामना…खुशी आप के कदम चूमे,कभी ना हो दुखों का सामना…धन ही धन आए आपके आंगन में,दशहरा के शुभ अवसर पर हमारी है यही मनोकामना,विजयदशमी की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍हैप्पी दशहरा 2021आपके जीवन में कभी-भी कोई गम ना आएआपको दशहरा की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं,हैप्पी दशहरा 2021📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍अत्याचार मिटाने के लिए अब हर घर से एक राम निकलेगाअन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैरावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैभ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगाअब हर घर से एक राम निकलेगामंगलमय हो दशहरा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!दशहरा एक उम्मीद जगाता है,बुराई के अंत की याद दिलाता है,जो चलता है सत्य की राह परवो विजय का प्रतीक बन जाता हैंदशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएंसत्य स्थापित करके, इस देश से बुराई को मिटाना होगा,आतंकी रावण का दहन करने आज फिर राम को आना होगा,आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍अधर्म पर धर्म की जीत का त्‍योहार है दशहराअधर्म पर धर्म की जीत,अन्याय पर न्याय की विजय,असत्य पर सत्य की जीत,बुराई पर अच्छाई की जय जयकार,यही है दशहरा का त्योहार।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍आपको दशहरा की कोटि-कोटि बधाईइस दशहरा प्रण लेना होगा,रावण नहीं राम बनकर रहना होगा,बुराई के खिलाफ आवाज उठाना होगा,हर बच्ची को आज दुर्गा बनाना होगा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा की शुभकामना व बधाई संदेशबुराई का होता है विनाश,दशहरा लाता है उम्मीद की आस,रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍विजय दशमी की यूं दें बधाइयांभीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगेसही मायने में वे ही दशहरा मनाएंगे..!शुभ विजयादशमी.📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍यही है दशहरे के शुभ अवसर पर मनोकामना…खुशी आप के कदम चूमे,कभी ना हो दुखों का सामना,धन ही धन आए आप के अंगना,यही है दशहरे के शुभ अवसर पर मनोकामना।आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍इससे पहले कि दशहरा की शाम हो जाए…इससे पहले कि दशहरा की शाम हो जाए,मेरा SMS औरों की तरह आम हो जाए,सारे Mobile Network जाम हो जाएं और दशहरा विश करना आम हो जाए… हैप्पी दशहरा आपको.📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍भीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगे…भीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगेसही मायने में वे ही दशहरा मनाएंगे..!शुभ विजयादशमी.📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍बुराई पर अच्छाई की जीत का समय…उत्सव का एक समय,बुराई पर अच्छाई की जीत का समय,एक समय जब दुनिया अच्छाई की शक्ति का उदाहरण देखती है,आइए हम उसी सच्ची भावना को जारी रखेंहैप्पी दशहरा.📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍रावण जलाओ, बुराई को आग लगाओ…रावण जलाओ,बुराई को आग लगाओ,अच्छाई को अपनाओ,हैप्पी दशहरा📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍विजयादशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीरामविजयादशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीरामबुराई पर अच्छाई का प्रतीक हैं श्री रामदशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास…बुराई का होता है विनाश,दशहरा लाता है उम्मीद की आस,रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍तहे दिल से कह रहा हूं हैप्पी दशहरा 2021आपकी जीवन में हो खुशियों का बसेरातहे दिल से कह रहा हूं हैप्पी दशहरा 2021📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍आयो मिलकर दशहरा मनाएं…आयो मिलकर दशहरा मनाएंअपने अंहकार रूपी रावण को जलाएंहैप्पी दशहरा📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा का पर्व है अच्छाई का प्रतीक…दशहरा का पर्व है अच्छाई का प्रतीकबुराई की राह पर चलकर हार है निश्चितइस संदेश को करो अपने जीवन में शामिलदशहरा पर्व की शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍बुरे पर अच्छे की जय जयकार…धर्म पर धर्म की जीत, अन्याय पर न्याय की विजयबुरे पर अच्छे की जय जयकार, यही है दशहरा का त्योहार।👭👭👭👭👭👭👭👭👭👭👭इस दशहरे हर मनुष्य बस एक नेक काम करें…इस दशहरे हर मनुष्य बस एक नेक काम करेंअंतर्मन में पनप रही हर बुराई का सर्वनाश करेंइसी कामना के साथ आपको दशहरे की शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍 14 Oct 2021आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएंसत्य स्थापित करके, इस देश से बुराई को मिटाना होगाआतंकी रावण का दहन करने आज फिर राम को आना होगाआपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍आपको दशहरा की ढेरों सारी शुभ कामनाएं…आपके जीवन में कभी-भी कोई गम ना आएआपको दशहरा की ढेरों सारी शुभ कामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍Happy Dussehra 2021 Wishes: दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएंइससे पहले की दशहरे की शाम हो जाए,मेरा मैसेज औरों की तरह आम हो जाए,सारे मोबाइल नेटवर्क जाम हो जाएं,और दशहरा विश करना आम हो जाए📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍*बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब*आप सभी को Happy Vijayadashamतीन लोग आपका नंबर मांग रहे हैं, मैंने नहीं दिया.वो दशहरा के दिन आयेंगे उनके नाम हैं…सुख..!!शांति..!!समृधि..!!हैप्पी विजयदशमी।विजयदशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीरामबुराई पर अच्छाई का प्रतीक हैं श्री रामदशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍

मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयदशमी भी कहा जाता है। 📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍 *बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संगरिया की टीम की तरफ से सभी को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं* 📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍 : बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है दशहरा शारदीय नवरात्रि के नौ दिन समाप्त होने के बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। दशहरा का यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयादशमी भी कहा जाता है। इस साल 15 अक्टूबर को यह त्योहार मनाया जाएगा। 📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍 दशहरे के दिन जगह-जगह पर मेले का आयोजन होता है, साथ ही रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले फूंके जाते हैं। असत्य पर सत्य की जीत के इस प्रतीक के दिन लोग अपने मित्रों, परिजनों और रिश्तेदारों को संदेश भेजकर शुभकामनाएं देते हैं। आप भी इन संदेशों के...

, हाल दिल का तुझसे केह दिया तेरा काम जाने, मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने रंग दुनिया के मैं न समज पाती हु हस के माया में तेरी उलज जाती हु कैसे रखता है तू सब पे लगाम जाने मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने तुझको मंजूर जो जग में होता वही राज गेहरा हो कितना वो छुपता नही सिवा तेरे न किसी का कोई अंजाम जाने मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने छोड़ा जग तो प्रबु तेरा दर मिल गया इस दास को चरणों में घर मिल गया कैसे रखे गा तू भगतो का समान जाने मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने by समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब,

 

🐦पाणिग्रहण जब कीन्ह महेशा। हीय हरषे तब सकल सुरेशा।🐦#बाल #वनिता #महिला वृद्ध #आश्रम की #अध्यक्ष #श्रीमती #वनिता_कासनियां #पंजाब #संगरिया #राजस्थान#शिव पार्वती विवाह ➖पाणिग्रहण संस्कार➖विदाई का वर्णन➖सास ससुर एवम भोले बाबा के बीच वार्ता का वर्णन➖अदभुद प्रसंग रामचरित मानस🐦🐦🐦महाशिवरात्रि की अग्रिम #शुभकामनाएं🐦🐦 बाजही बाजे विविध विधाना सुमनबृष्टि नभ भें विधि नाना🚩 करेहू सदा शंकर पद पूजा। नारिधरम पद देउ ना दूजा।🚩 जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई॥🚩 गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी॥1॥🚩तुलसीदास जी मधुर एवम मनोरम चौपाइयों के द्वारा ➖शिव पार्वती विवाह ➖का विस्तृत वर्णन किया है । हमे इस प्रसंग को सुनना एवम पढ़ना चाहिए ।इसके सुनने से मनुष्य की शिव के चरणों की भक्ति प्राप्त होगी।➖जय भोले शंकर➖भावार्थ:-वेदों में विवाह की जैसी रीति कही गई है, महामुनियों ने वह सभी रीति करवाई। पर्वतराज हिमाचल ने हाथ में कुश लेकर तथा कन्या का हाथ पकड़कर उन्हें भवानी (शिवपत्नी) जानकर शिवजी को समर्पण किया॥॥🚩 पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हियँ हरषे तब सकल सुरेसा॥बेदमन्त्र मुनिबर उच्चरहीं। जय जय जय संकर सुर करहीं॥🚩भावार्थ:-जब महेश्वर (शिवजी) ने पार्वती का पाणिग्रहण किया, तब (इन्द्रादि) सब देवता हृदय में बड़े ही हर्षित हुए। श्रेष्ठ मुनिगण वेदमंत्रों का उच्चारण करने लगे और देवगण शिवजी का जय-जयकार करने लगे॥॥🚩बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना। सुमनबृष्टि नभ भै बिधि नाना॥हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू॥॥🚩भावार्थ:-अनेकों प्रकार के बाजे बजने लगे। आकाश से नाना प्रकार के फूलों की वर्षा हुई। शिव-पार्वती का विवाह हो गया। सारे ब्राह्माण्ड में आनंद भर गया॥🚩 दासीं दास तुरग रथ नागा। धेनु बसन मनि बस्तु बिभागा॥अन्न कनकभाजन भरि जाना। दाइज दीन्ह न जाइ बखाना॥॥🚩भावार्थ:-दासी, दास, रथ, घोड़े, हाथी, गायें, वस्त्र और मणि आदि अनेक प्रकार की चीजें, अन्न तथा सोने के बर्तन गाड़ियों में लदवाकर दहेज में दिए, जिनका वर्णन नहीं हो सकता॥॥🚩छन्द : दाइज दियो बहु भाँति पुनि कर जोरि हिमभूधर कह्यो।का देउँ पूरनकाम संकर चरन पंकज गहि रह्यो॥ सिवँ कृपासागर ससुर कर संतोषु सब भाँतिहिं कियो।पुनि गहे पद पाथोज मयनाँ प्रेम परिपूरन हियो॥🚩भावार्थ:-बहुत प्रकार का दहेज देकर, फिर हाथ जोड़कर हिमाचल ने कहा- हे शंकर! आप पूर्णकाम हैं, मैं आपको क्या दे सकता हूँ? (इतना कहकर) वे शिवजी के चरणकमल पकड़कर रह गए। तब कृपा के सागर शिवजी ने अपने ससुर का सभी प्रकार से समाधान किया। फिर प्रेम से परिपूर्ण हृदय मैनाजी ने शिवजी के चरण कमल पकड़े (और कहा-)।🚩दोहा :नाथ उमा मम प्रान सम गृहकिंकरी करेहु।छमेहु सकल अपराध अब होइ प्रसन्न बरु देहु॥॥🚩भावार्थ:-हे नाथ! यह उमा मुझे मेरे प्राणों के समान (प्यारी) है। आप इसे अपने घर की टहलनी बनाइएगा और इसके सब अपराधों को क्षमा करते रहिएगा। अब प्रसन्न होकर मुझे यही वर दीजिए।।🚩चौपाई :बहु बिधि संभु सासु समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई॥जननीं उमा बोलि तब लीन्ही। लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही॥॥🚩भावार्थ:-शिवजी ने बहुत तरह से अपनी सास को समझाया। तब वे शिवजी के चरणों में सिर नवाकर घर गईं। फिर माता ने पार्वती को बुला लिया और गोद में बिठाकर यह सुंदर सीख दी-॥🚩करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा॥बचन कहत भरे लोचन बारी। बहुरि लाइ उर लीन्हि कुमारी॥॥🚩भावार्थ:-हे पार्वती! तू सदाशिवजी के चरणों की पूजा करना, नारियों का यही धर्म है। उनके लिए पति ही देवता है और कोई देवता नहीं है। इस प्रकार की बातें कहते-कहते उनकी आँखों में आँसू भर आए और उन्होंने कन्या को छाती से चिपटा लिया॥2॥🚩 कत बिधि सृजीं नारि जग माहीं। पराधीन सपनेहूँ सुखु नाहीं॥भै अति प्रेम बिकल महतारी। धीरजु कीन्ह कुसमय बिचारी॥🚩भावार्थ:-(फिर बोलीं कि) विधाता ने जगत में स्त्री जाति को क्यों पैदा किया? पराधीन को सपने में भी सुख नहीं मिलता। यों कहती हुई माता प्रेम में अत्यन्त विकल हो गईं, परन्तु कुसमय जानकर (दुःख करने का अवसर न जानकर) उन्होंने धीरज धरा॥॥🚩* पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेमु कछु जाइ न बरना॥सब नारिन्ह मिलि भेंटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी॥॥🚩भावार्थ:-मैना बार-बार मिलती हैं और (पार्वती के) चरणों को पकड़कर गिर पड़ती हैं। बड़ा ही प्रेम है, कुछ वर्णन नहीं किया जाता। भवानी सब स्त्रियों से मिल-भेंटकर फिर अपनी माता के हृदय से जा लिपटीं॥॥🚩छन्द :* जननिहि बहुरि मिलि चली उचित असीस सब काहूँ दईं।फिरि फिरि बिलोकति मातु तन तब सखीं लै सिव पहिं गईं॥ जाचक सकल संतोषि संकरु उमा सहित भवन चले।सब अमर हरषे सुमन बरषि निसान नभ बाजे भले॥🚩भावार्थ:-पार्वतीजी माता से फिर मिलकर चलीं, सब किसी ने उन्हें योग्य आशीर्वाद दिए। पार्वतीजी फिर-फिरकर माता की ओर देखती जाती थीं। तब सखियाँ उन्हें शिवजी के पास ले गईं। महादेवजी सब याचकों को संतुष्ट कर पार्वती के साथ घर (कैलास) को चले। सब देवता प्रसन्न होकर फूलों की वर्षा करने लगे और आकाश में सुंदर नगाड़े बजाने लगे।🚩दोहा :* चले संग हिमवंतु तब पहुँचावन अति हेतु।बिबिध भाँति परितोषु करि बिदा कीन्ह बृषकेतु॥102॥🚩भावार्थ:-तब हिमवान्‌ अत्यन्त प्रेम से शिवजी को पहुँचाने के लिए साथ चले। वृषकेतु (शिवजी) ने बहुत तरह से उन्हें संतोष कराकर विदा किया॥102॥.🚩चौपाई :* तुरत भवन आए गिरिराई। सकल सैल सर लिए बोलाई॥आदर दान बिनय बहुमाना। सब कर बिदा कीन्ह हिमवाना॥1॥🚩भावार्थ:-पर्वतराज हिमाचल तुरंत घर आए और उन्होंने सब पर्वतों और सरोवरों को बुलाया। हिमवान ने आदर, दान, विनय और बहुत सम्मानपूर्वक सबकी विदाई की॥1॥🚩* जबहिं संभु कैलासहिं आए। सुर सब निज निज लोक सिधाए॥जगत मातु पितु संभु भवानी। तेहिं सिंगारु न कहउँ बखानी॥2॥🚩भावार्थ:-जब शिवजी कैलास पर्वत पर पहुँचे, तब सब देवता अपने-अपने लोकों को चले गए। (तुलसीदासजी कहते हैं कि) पार्वतीजी और शिवजी जगत के माता-पिता हैं, इसलिए मैं उनके श्रृंगार का वर्णन नहीं करता॥2॥🚩* करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा॥हर गिरिजा बिहार नित नयऊ। एहि बिधि बिपुल काल चलि गयऊ॥3॥🚩भावार्थ:-शिव-पार्वती विविध प्रकार के भोग-विलास करते हुए अपने गणों सहित कैलास पर रहने लगे। वे नित्य नए विहार करते थे। इस प्रकार बहुत समय बीत गया॥3॥🚩* जब जनमेउ षटबदन कुमारा। तारकु असुरु समर जेहिं मारा॥आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। षन्मुख जन्मु सकल जग जाना॥4॥🚩भावार्थ:-तब छ: मुखवाले पुत्र (स्वामिकार्तिक) का जन्म हुआ, जिन्होंने (बड़े होने पर) युद्ध में तारकासुर को मारा। वेद, शास्त्र और पुराणों में स्वामिकार्तिक के जन्म की कथा प्रसिद्ध है और सारा जगत उसे जानता है॥4॥🚩छन्द :* जगु जान षन्मुख जन्मु कर्मु प्रतापु पुरुषारथु महा।तेहि हेतु मैं बृषकेतु सुत कर चरित संछेपहिं कहा॥ यह उमा संभु बिबाहु जे नर नारि कहहिं जे गावहीं।कल्यान काज बिबाह मंगल सर्बदा सुखु पावहीं॥🚩भावार्थ:-षडानन (स्वामिकार्तिक) के जन्म, कर्म, प्रताप और महान पुरुषार्थ को सारा जगत जानता है, इसलिए मैंने वृषकेतु (शिवजी) के पुत्र का चरित्र संक्षेप में ही कहा है। शिव-पार्वती के विवाह की इस कथा को जो स्त्री-पुरुष कहेंगे और गाएँगे, वे कल्याण के कार्यों और विवाहादि मंगलों में सदा सुख पाएँगे।🚩दोहा :* चरित सिंधु गिरिजा रमन बेद न पावहिं पारु।बरनै तुलसीदासु किमि अति मतिमंद गवाँरु॥103॥🚩भावार्थ:-गिरिजापति महादेवजी का चरित्र समुद्र के समान (अपार) है, उसका पार वेद भी नहीं पाते। तब अत्यन्त मन्दबुद्धि और गँवार तुलसीदास उसका वर्णन कैसे कर सकता है? ॥103॥🚩चौपाई :* संभु चरित सुनि सरस सुहावा। भरद्वाज मुनि अति सुखु पावा॥बहु लालसा कथा पर बाढ़ी। नयनन्हि नीरु रोमावलि ठाढ़ी॥1॥🚩भावार्थ:-शिवजी के रसीले और सुहावने चरित्र को सुनकर मुनि भरद्वाजजी ने बहुत ही सुख पाया। कथा सुनने की उनकी लालसा बहुत बढ़ गई। नेत्रों में जल भर आया तथा रोमावली खड़ी हो गई॥1॥🚩* प्रेम बिबस मुख आव न बानी। दसा देखि हरषे मुनि ग्यानी॥अहो धन्य तब जन्मु मुनीसा। तुम्हहि प्रान सम प्रिय गौरीसा॥2॥🚩भावार्थ:-वे प्रेम में मुग्ध हो गए, मुख से वाणी नहीं निकलती। उनकी यह दशा देखकर ज्ञानी मुनि याज्ञवल्क्य बहुत प्रसन्न हुए (और बोले-) हे मुनीश! अहा हा! तुम्हारा जन्म धन्य है, तुमको गौरीपति शिवजी प्राणों के समान प्रिय हैं॥2॥🚩* सिव पद कमल जिन्हहि रति नाहीं। रामहि ते सपनेहुँ न सोहाहीं॥बिनु छल बिस्वनाथ पद नेहू। राम भगत कर लच्छन एहू॥॥🚩भावार्थ:-शिवजी के चरण कमलों में जिनकी प्रीति नहीं है, वे श्री रामचन्द्रजी को स्वप्न में भी अच्छे नहीं लगते। विश्वनाथ श्री शिवजी के चरणों में निष्कपट (विशुद्ध) प्रेम होना यही रामभक्त का लक्षण है॥3॥🚩* सिव सम को रघुपति ब्रतधारी। बिनु अघ तजी सती असि नारी॥पनु करि रघुपति भगति देखाई। को सिव सम रामहि प्रिय भाई॥4॥🚩भावार्थ:-शिवजी के समान रघुनाथजी (की भक्ति) का व्रत धारण करने वाला कौन है? जिन्होंने बिना ही पाप के सती जैसी स्त्री को त्याग दिया और प्रतिज्ञा करके श्री रघुनाथजी की भक्ति को दिखा दिया। हे भाई! श्री रामचन्द्रजी को शिवजी के समान और कौन प्यारा है?॥4॥🚩दोहा :* प्रथमहिं मैं कहि सिव चरित बूझा मरमु तुम्हार।सुचि सेवक तुम्ह राम के रहित समस्त बिकार॥🚩भावार्थ:-मैंने पहले ही शिवजी का चरित्र कहकर तुम्हारा भेद समझ लिया। तुम श्री रामचन्द्रजी के पवित्र सेवक हो और समस्त दोषों से रहित हो॥104॥🚩चौपाई :*मैं जाना तुम्हार गुन सीला। कहउँ सुनहु अब रघुपति लीला॥सुनु मुनि आजु समागम तोरें। कहि न जाइ जस सुखु मन मोरें॥॥🚩भावार्थ:-मैंने तुम्हारा गुण और शील जान लिया। अब मैं श्री रघुनाथजी की लीला कहता हूँ, सुनो। हे मुनि! सुनो, आज तुम्हारे मिलने से मेरे मन में जो आनंद हुआ है, वह कहा नहीं जा सकता॥1॥🚩*राम चरित अति अमित मुनीसा। कहि न सकहिं सत कोटि अहीसा॥तदपि जथाश्रुत कहउँ बखानी। सुमिरि गिरापति प्रभु धनुपानी॥॥🚩भावार्थ:-हे मुनीश्वर! रामचरित्र अत्यन्त अपार है। सौ करोड़ शेषजी भी उसे नहीं कह सकते। तथापि जैसा मैंने सुना है, वैसा वाणी के स्वामी (प्रेरक) और हाथ में धनुष लिए हुए प्रभु श्री रामचन्द्रजी का स्मरण करके कहता हूँ॥2॥🚩*सारद दारुनारि सम स्वामी। रामु सूत्रधर अंतरजामी॥जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी॥॥🚩भावार्थ:-सरस्वतीजी कठपुतली के समान हैं और अन्तर्यामी स्वामी श्री रामचन्द्रजी (सूत पकड़कर कठपुतली को नचाने वाले) सूत्रधार हैं। अपना भक्त जानकर जिस कवि पर वे कृपा करते हैं, उसके हृदय रूपी आँगन में सरस्वती को वे नचाया करते हैं॥🚩* प्रनवउँ सोइ कृपाल रघुनाथा। बरनउँ बिसद तासु गुन गाथा॥परम रम्य गिरिबरु कैलासू। सदा जहाँ सिव उमा निवासू॥॥🚩भावार्थ:-उन्हीं कृपालु श्री रघुनाथजी को मैं प्रणाम करता हूँ और उन्हीं के निर्मल गुणों की कथा कहता हूँ। कैलास पर्वतों में श्रेष्ठ और बहुत ही रमणीय है, जहाँ शिव-पार्वतीजी सदा निवास करते हैं॥॥🚩दोहा :सिद्ध तपोधन जोगिजन सुर किंनर मुनिबृंद।बसहिं तहाँ सुकृती सकल सेवहिं सिव सुखकंद॥॥🚩भावार्थ:-सिद्ध, तपस्वी, योगीगण, देवता, किन्नर और मुनियों के समूह उस पर्वत पर रहते हैं। वे सब बड़े पुण्यात्मा हैं और आनंदकन्द श्री महादेवजी की सेवा करते हैं॥॥🚩चौपाई :* हरि हर बिमुख धर्म रति नाहीं। ते नर तहँ सपनेहुँ नहिं जाहीं॥तेहि गिरि पर बट बिटप बिसाला। नित नूतन सुंदर सब काला॥1॥🚩भावार्थ:-जो भगवान विष्णु और महादेवजी से विमुख हैं और जिनकी धर्म में प्रीति नहीं है, वे लोग स्वप्न में भी वहाँ नहीं जा सकते। उस पर्वत पर एक विशाल बरगद का पेड़ है, जो नित्य नवीन और सब काल (छहों ऋतुओं) में सुंदर रहता है॥1॥🚩* त्रिबिध समीर सुसीतलि छाया। सिव बिश्राम बिटप श्रुति गाया॥एक बार तेहि तर प्रभु गयऊ। तरु बिलोकि उर अति सुखु भयऊ॥2॥🚩भावार्थ:-वहाँ तीनों प्रकार की (शीतल, मंद और सुगंध) वायु बहती रहती है और उसकी छाया बड़ी ठंडी रहती है। वह शिवजी के विश्राम करने का वृक्ष है, जिसे वेदों ने गाया है। एक बार प्रभु श्री शिवजी उस वृक्ष के नीचे गए और उसे देखकर उनके हृदय में बहुत आनंद हुआ॥2॥🚩*निज कर डासि नागरिपु छाला। बैठे सहजहिं संभु कृपाला॥कुंद इंदु दर गौर सरीरा। भुज प्रलंब परिधन मुनिचीरा॥3॥🚩भावार्थ:-अपने हाथ से बाघम्बर बिछाकर कृपालु शिवजी स्वभाव से ही (बिना किसी खास प्रयोजन के) वहाँ बैठ गए। कुंद के पुष्प, चन्द्रमा और शंख के समान उनका गौर शरीर था। बड़ी लंबी भुजाएँ थीं और वे मुनियों के से (वल्कल) वस्त्र धारण किए हुए थे॥3॥🚩* तरुन अरुन अंबुज सम चरना। नख दुति भगत हृदय तम हरना॥भुजग भूति भूषन त्रिपुरारी। आननु सरद चंद छबि हारी॥॥🚩भावार्थ:-उनके चरण नए (पूर्ण रूप से खिले हुए) लाल कमल के समान थे, नखों की ज्योति भक्तों के हृदय का अंधकार हरने वाली थी। साँप और भस्म ही उनके भूषण थे और उन त्रिपुरासुर के शत्रु शिवजी का मुख शरद (पूर्णिमा) के चन्द्रमा की शोभा को भी हरने वाला (फीकी करने वाला) था॥॥🚩#Vnita🙏 🙏❤️🐦हर हर महादेव➖सत्यम शिवम सुन्दरम🐦

🐦पाणिग्रहण जब कीन्ह महेशा।           हीय हरषे तब सकल सुरेशा।🐦 #बाल #वनिता #महिला वृद्ध #आश्रम की #अध्यक्ष #श्रीमती #वनिता_कासनियां #पंजाब #संगरिया #राजस्थान #शिव पार्वती विवाह ➖पाणिग्रहण संस्कार➖विदाई का वर्णन➖सास ससुर एवम भोले बाबा के बीच वार्ता का वर्णन➖अदभुद प्रसंग रामचरित मानस🐦 🐦🐦महाशिवरात्रि की अग्रिम #शुभकामनाएं🐦🐦  बाजही बाजे विविध विधाना       सुमनबृष्टि नभ भें विधि नाना🚩      करेहू सदा शंकर पद पूजा।           नारिधरम पद देउ ना दूजा।🚩      जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई।            महामुनिन्ह सो सब करवाई॥🚩         गहि गिरीस कुस कन्या पानी।       भवहि समरपीं जानि भवानी॥1॥🚩 तुलसीदास जी मधुर एवम मनोरम चौपाइयों के द्वारा ➖शिव पार्वती विवाह ➖का विस्तृत वर्णन किया है । हमे इस प्रसंग को सुनना एवम पढ़ना चाहिए ।इसके सुनने से मनुष्य की शिव के चरणों की भक्ति प्राप्त होगी।➖जय भोले शंकर➖ भावार्थ:-वेदों में विवाह की जै...