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हिन्दुओं के प्रमुख देवता हनुमानजी के बारे में कई रहस्य जो अभी तक छिपे हुए हैं। शास्त्रों अनुसार हनुमानजी इस धरती पर एक कल्प तक सशरीर रहेंगे।बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब 1. हनुमानजी का जन्म स्थान🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸कर्नाटक के कोपल जिले में स्थित हम्पी के निकट बसे हुए ग्राम अनेगुंदी को रामायणकालीन किष्किंधा मानते हैं। तुंगभद्रा नदी को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय मार्ग में पंपा सरोवर आता है। यहां स्थित एक पर्वत में शबरी गुफा है जिसके निकट शबरी के गुरु मतंग ऋषि के नाम पर प्रसिद्ध 'मतंगवन' था।हम्पी में ऋष्यमूक के राम मंदिर के पास स्थित पहाड़ी आज भी मतंग पर्वत के नाम से जानी जाती है। कहते हैं कि मतंग ऋषि के आश्रम में ही हनुमानजी का जन्म हआ था। श्रीराम के जन्म के पूर्व हनुमानजी का जन्म हुआ था। प्रभु श्रीराम का जन्म 5114 ईसा पूर्व अयोध्या में हुआ था। हनुमान का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन हुआ था।2.कल्प के अंत तक सशरीर रहेंगे हनुमानजी🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔹🔸🔸🔹🔸🔸इंद्र से उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान मिला। श्रीराम के वरदान अनुसार कल्प का अंत होने पर उन्हें उनके सायुज्य की प्राप्ति होगी। सीता माता के वरदान अनुसार वे चिरजीवी रहेंगे। इसी वरदान के चलते द्वापर युग में हनुमानजी भीम और अर्जुन की परीक्षा लेते हैं। कलियुग में वे तुलसीदासजी को दर्शन देते हैं।ये वचन हनुमानजी ने ही तुलसीदासजी से कहे थे-'चित्रकूट के घाट पै, भई संतन के भीर।तुलसीदास चंदन घिसै, तिलक देत रघुबीर।।'श्रीमद् भागवत अनुसार हनुमानजीकलियुग में गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं।3.कपि नामक वानर🔸🔸🔹🔹🔸🔸हनुमानजी का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था। रामायणादि ग्रंथों में हनुमानजी और उनके सजातीय बांधव सुग्रीव अंगदादि के नाम के साथ 'वानर, कपि, शाखामृग, प्लवंगम' आदि विशेषण प्रयुक्त किए गए। उनकी पुच्छ, लांगूल, बाल्धी और लाम से लंकादहन इसका प्रमाण है कि वे वानर थे।रामायण में वाल्मीकिजी ने जहां उन्हें विशिष्ट पंडित, राजनीति में धुरंधर और वीर-शिरोमणि प्रकट किया है, वहीं उनको लोमश ओर पुच्छधारी भी शतश: प्रमाणों में व्यक्त किया है। अत: सिद्ध होता है कि वे जाति से वानर थे।4. हनुमान परिवार🔸🔸🔹🔸🔸हनुमानजी की माता का अंजनी पूर्वजन्म में पुंजिकस्थला नामक अप्सरा थीं। उनके पिता का नाम कपिराज केसरी था। ब्रह्मांडपुराण अनुसार हनुमानजी सबसे बड़े भाई हैं। उनके बाद मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान, धृतिमान थे।कहते हैं कि जब वर्षों तक केसरी से अंजना को कोई पुत्र नहीं हुआ तो पवनदेव के आशिर्वाद से उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ। इसीलिए हनुमानजी को पवनपुत्र भी कहते हैं। कुंति पुत्र भीम भी पवनपुत्र हैं। हनुमानजी रुद्रावतार हैं।पराशर संहिता अनुसार सूर्यदेव की शिक्षा देने की शर्त अनुसार हनुमानजी को सुवर्चला नामक स्त्री से विवाह करना पड़ा था।5. इन बाधाओं से बचाते हैं हनुमानजी🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸रोग और शोक, भूत-पिशाच, शनि, राहु-केतु और अन्य ग्रह बाधा, कोर्ट-कचहरी-जेल बंधन, मारण-सम्मोहन-उच्चाटन, घटना-दुर्घटना से बचना, मंगल दोष, पितृदोष, कर्ज, संताप, बेरोजगारी, तनाव या चिंता, शत्रु बाधा, मायावी जाल आदि से हनुमानजी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।6. हनुमानजी के पराक्रम🔸🔸🔹🔸🔹🔸🔸हनुमान सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ और सर्वत्र हैं। बचपन में उन्होंने सूर्य को निकल लिया था। एक ही छलांक में वे समुद्र लांघ गए थे। उन्होंने समुद्र में राक्षसी माया का वध किया। लंका में घुसते ही उन्होंने लंकिनी और अन्य राक्षसों के वध कर दिया।अशोक वाटिका को उजाड़कर अक्षय कुमार का वध कर दिया। जब उनकी पूछ में आग लगाई गई तो उन्हों लंका जला दी। उन्होंने सीता को अंगुठी दी, विभिषण को राम से मिलाया। हिमालय से एक पहाड़ उठाकर ले आए और लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा की।इस बीच उन्होंने कालनेमि राक्षस का वध कर दिया। पाताल लोक में जाकर राम-लक्ष्मण को छुड़ाया और अहिरावण का वध किया। उन्होंने सत्यभामा, गरूढ़, सुदर्शन, भीम और अर्जुन का घमंड चूर चूर कर दिया था।हनुमानजी के ऐसे सैंकड़ों पराक्रम हैं।7.हनुमाजी पर लिखे गए ग्रंथ🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸तुलसीदासजी ने हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान बहुक, हनुमान साठिका, संकटमोचन हनुमानाष्टक, आदि अनेक स्तोत्र लिखे। तुलसीदासजी के पहले भी कई संतों और साधुओं ने हनुमानजी की श्रद्धा में स्तुति लिखी है।इंद्रा‍दि देवताओं के बाद हनुमानजी पर विभीषण ने हनुमान वडवानल स्तोत्र की रचना की। समर्थ रामदास द्वारा मारुती स्तोत्र रचा गया। आनं‍द रामायण में हनुमान स्तुति एवं उनके द्वादश नाम मिलते हैं। इसके अलावा कालांतर में उन पर हजारों वंदना, प्रार्थना, स्त्रोत, स्तुति, मंत्र, भजन लिखे गए हैं। गुरु गोरखनाथ ने उन पर साबर मं‍त्रों की रचना की है।8. माता जगदम्बा के सेवक हनुमानजी🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸रामभक्त हनुमानजी माता जगदम्बा के सेवक भी हैं। हनुमानजी माता के आगे-आगे चलते हैं और भैरवजी पीछे-पीछे। माता के देशभर में जितने भी मंदिर है वहां उनके आसपास हनुमानजी और भैरव के मंदिर जरूर होते हैं। हनुमानजी की खड़ी मुद्रा में और भैरवजी की मुंड मुद्रा में प्रतिमा होती है। कुछ लोग उनकी यह कहानी माता वैष्णोदेवी से जोड़कर देखते हैं।9. सर्वशक्तिमान हनुमानजी🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸हनुमानजी के पास कई वरदानी शक्तियां थीं लेकिन फिर भी वे बगैर वरदानी शक्तियों के भी शक्तिशाली थे। ब्रह्मदेव ने हनुमानजी को तीन वरदान दिए थे, जिनमें उन पर ब्रह्मास्त्र बेअसर होना भी शामिल था, जो अशोकवाटिका में काम आया।सभी देवताओं के पास अपनी अपनी शक्तियां हैं। जैसे विष्णु के पास लक्ष्मी, महेश के पास पार्वती और ब्रह्मा के पास सरस्वती। हनुमानजी के पास खुद की शक्ति है। इस ब्रह्मांड में ईश्वर के बाद यदि कोई एक शक्ति है तो वह है हनुमानजी। महावीर विक्रम बजरंगबली के समक्ष किसी भी प्रकार की मायावी शक्ति ठहर नहीं सकती।10. इन्होंने देखा हनुमानजी को🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸13वीं शताब्दी में माध्वाचार्य, 16वीं शताब्दी में तुलसीदास, 17वीं शताब्दी में रामदास, राघवेन्द्र स्वामी और 20वीं शताब्दी में स्वामी रामदास हनुमान को देखने का दावा करते हैं। हनुमानजी त्रेता में श्रीराम, द्वापर में श्रीकृष्ण और अर्जुन और कलिकाल में रामभक्तों की सहायता करते हैं।🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔹

हिन्दुओं के प्रमुख देवता हनुमानजी के बारे में कई रहस्य जो अभी तक छिपे हुए हैं। शास्त्रों अनुसार हनुमानजी इस धरती पर एक कल्प तक सशरीर रहेंगे।

बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब 

1. हनुमानजी का जन्म स्थान

🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸

कर्नाटक के कोपल जिले में स्थित हम्पी के निकट बसे हुए ग्राम अनेगुंदी को रामायणकालीन किष्किंधा मानते हैं। तुंगभद्रा नदी को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय मार्ग में पंपा सरोवर आता है। यहां स्थित एक पर्वत में शबरी गुफा है जिसके निकट शबरी के गुरु मतंग ऋषि के नाम पर प्रसिद्ध 'मतंगवन' था।

हम्पी में ऋष्यमूक के राम मंदिर के पास स्थित पहाड़ी आज भी मतंग पर्वत के नाम से जानी जाती है। कहते हैं कि मतंग ऋषि के आश्रम में ही हनुमानजी का जन्म हआ था। श्रीराम के जन्म के पूर्व हनुमानजी का जन्म हुआ था। प्रभु श्रीराम का जन्म 5114 ईसा पूर्व अयोध्या में हुआ था। हनुमान का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन हुआ था।

2.कल्प के अंत तक सशरीर रहेंगे हनुमानजी

🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔹🔸🔸🔹🔸🔸

इंद्र से उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान मिला। श्रीराम के वरदान अनुसार कल्प का अंत होने पर उन्हें उनके सायुज्य की प्राप्ति होगी। सीता माता के वरदान अनुसार वे चिरजीवी रहेंगे। इसी वरदान के चलते द्वापर युग में हनुमानजी भीम और अर्जुन की परीक्षा लेते हैं। कलियुग में वे तुलसीदासजी को दर्शन देते हैं।

ये वचन हनुमानजी ने ही तुलसीदासजी से कहे थे-

'चित्रकूट के घाट पै, भई संतन के भीर।

तुलसीदास चंदन घिसै, तिलक देत रघुबीर।।'

श्रीमद् भागवत अनुसार हनुमानजी

कलियुग में गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं।

3.कपि नामक वानर

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हनुमानजी का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था। रामायणादि ग्रंथों में हनुमानजी और उनके सजातीय बांधव सुग्रीव अंगदादि के नाम के साथ 'वानर, कपि, शाखामृग, प्लवंगम' आदि विशेषण प्रयुक्त किए गए। उनकी पुच्छ, लांगूल, बाल्धी और लाम से लंकादहन इसका प्रमाण है कि वे वानर थे।

रामायण में वाल्मीकिजी ने जहां उन्हें विशिष्ट पंडित, राजनीति में धुरंधर और वीर-शिरोमणि प्रकट किया है, वहीं उनको लोमश ओर पुच्छधारी भी शतश: प्रमाणों में व्यक्त किया है। अत: सिद्ध होता है कि वे जाति से वानर थे।

4. हनुमान परिवार

🔸🔸🔹🔸🔸

हनुमानजी की माता का अंजनी पूर्वजन्म में पुंजिकस्थला नामक अप्सरा थीं। उनके पिता का नाम कपिराज केसरी था। ब्रह्मांडपुराण अनुसार हनुमानजी सबसे बड़े भाई हैं। उनके बाद मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान, धृतिमान थे।

कहते हैं कि जब वर्षों तक केसरी से अंजना को कोई पुत्र नहीं हुआ तो पवनदेव के आशिर्वाद से उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ। इसीलिए हनुमानजी को पवनपुत्र भी कहते हैं। कुंति पुत्र भीम भी पवनपुत्र हैं। हनुमानजी रुद्रावतार हैं।

पराशर संहिता अनुसार सूर्यदेव की शिक्षा देने की शर्त अनुसार हनुमानजी को सुवर्चला नामक स्त्री से विवाह करना पड़ा था।

5. इन बाधाओं से बचाते हैं हनुमानजी

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रोग और शोक, भूत-पिशाच, शनि, राहु-केतु और अन्य ग्रह बाधा, कोर्ट-कचहरी-जेल बंधन, मारण-सम्मोहन-उच्चाटन, घटना-दुर्घटना से बचना, मंगल दोष, पितृदोष, कर्ज, संताप, बेरोजगारी, तनाव या चिंता, शत्रु बाधा, मायावी जाल आदि से हनुमानजी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

6. हनुमानजी के पराक्रम

🔸🔸🔹🔸🔹🔸🔸

हनुमान सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ और सर्वत्र हैं। बचपन में उन्होंने सूर्य को निकल लिया था। एक ही छलांक में वे समुद्र लांघ गए थे। उन्होंने समुद्र में राक्षसी माया का वध किया। लंका में घुसते ही उन्होंने लंकिनी और अन्य राक्षसों के वध कर दिया।

अशोक वाटिका को उजाड़कर अक्षय कुमार का वध कर दिया। जब उनकी पूछ में आग लगाई गई तो उन्हों लंका जला दी। उन्होंने सीता को अंगुठी दी, विभिषण को राम से मिलाया। हिमालय से एक पहाड़ उठाकर ले आए और लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा की।

इस बीच उन्होंने कालनेमि राक्षस का वध कर दिया। पाताल लोक में जाकर राम-लक्ष्मण को छुड़ाया और अहिरावण का वध किया। उन्होंने सत्यभामा, गरूढ़, सुदर्शन, भीम और अर्जुन का घमंड चूर चूर कर दिया था।

हनुमानजी के ऐसे सैंकड़ों पराक्रम हैं।

7.हनुमाजी पर लिखे गए ग्रंथ

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तुलसीदासजी ने हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान बहुक, हनुमान साठिका, संकटमोचन हनुमानाष्टक, आदि अनेक स्तोत्र लिखे। तुलसीदासजी के पहले भी कई संतों और साधुओं ने हनुमानजी की श्रद्धा में स्तुति लिखी है।

इंद्रा‍दि देवताओं के बाद हनुमानजी पर विभीषण ने हनुमान वडवानल स्तोत्र की रचना की। समर्थ रामदास द्वारा मारुती स्तोत्र रचा गया। आनं‍द रामायण में हनुमान स्तुति एवं उनके द्वादश नाम मिलते हैं। इसके अलावा कालांतर में उन पर हजारों वंदना, प्रार्थना, स्त्रोत, स्तुति, मंत्र, भजन लिखे गए हैं। गुरु गोरखनाथ ने उन पर साबर मं‍त्रों की रचना की है।

8. माता जगदम्बा के सेवक हनुमानजी

🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸

रामभक्त हनुमानजी माता जगदम्बा के सेवक भी हैं। हनुमानजी माता के आगे-आगे चलते हैं और भैरवजी पीछे-पीछे। माता के देशभर में जितने भी मंदिर है वहां उनके आसपास हनुमानजी और भैरव के मंदिर जरूर होते हैं। हनुमानजी की खड़ी मुद्रा में और भैरवजी की मुंड मुद्रा में प्रतिमा होती है। कुछ लोग उनकी यह कहानी माता वैष्णोदेवी से जोड़कर देखते हैं।

9. सर्वशक्तिमान हनुमानजी

🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸

हनुमानजी के पास कई वरदानी शक्तियां थीं लेकिन फिर भी वे बगैर वरदानी शक्तियों के भी शक्तिशाली थे। ब्रह्मदेव ने हनुमानजी को तीन वरदान दिए थे, जिनमें उन पर ब्रह्मास्त्र बेअसर होना भी शामिल था, जो अशोकवाटिका में काम आया।

सभी देवताओं के पास अपनी अपनी शक्तियां हैं। जैसे विष्णु के पास लक्ष्मी, महेश के पास पार्वती और ब्रह्मा के पास सरस्वती। हनुमानजी के पास खुद की शक्ति है। इस ब्रह्मांड में ईश्वर के बाद यदि कोई एक शक्ति है तो वह है हनुमानजी। महावीर विक्रम बजरंगबली के समक्ष किसी भी प्रकार की मायावी शक्ति ठहर नहीं सकती।

10. इन्होंने देखा हनुमानजी को

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13वीं शताब्दी में माध्वाचार्य, 16वीं शताब्दी में तुलसीदास, 17वीं शताब्दी में रामदास, राघवेन्द्र स्वामी और 20वीं शताब्दी में स्वामी रामदास हनुमान को देखने का दावा करते हैं। हनुमानजी त्रेता में श्रीराम, द्वापर में श्रीकृष्ण और अर्जुन और कलिकाल में रामभक्तों की सहायता करते हैं।

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मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयदशमी भी कहा जाता है।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍*बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संगरिया की टीम की तरफ से सभी को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं*📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍: बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है दशहरा शारदीय नवरात्रि के नौ दिन समाप्त होने के बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। दशहरा का यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयादशमी भी कहा जाता है। इस साल 15 अक्टूबर को यह त्योहार मनाया जाएगा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरे के दिन जगह-जगह पर मेले का आयोजन होता है, साथ ही रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले फूंके जाते हैं। असत्य पर सत्य की जीत के इस प्रतीक के दिन लोग अपने मित्रों, परिजनों और रिश्तेदारों को संदेश भेजकर शुभकामनाएं देते हैं। आप भी इन संदेशों के जरिए अपने परिजनों को विश कर सकते 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खुशियां यह दशहरा आपको,हर प्यारी खुशी आपकी दीवानी हो जाए!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍खुशी आप के कदम चूमे, कभी ना हो दुखों का सामना…खुशी आप के कदम चूमे,कभी ना हो दुखों का सामना…धन ही धन आए आपके आंगन में,दशहरा के शुभ अवसर पर हमारी है यही मनोकामना,विजयदशमी की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍हैप्पी दशहरा 2021आपके जीवन में कभी-भी कोई गम ना आएआपको दशहरा की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं,हैप्पी दशहरा 2021📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍अत्याचार मिटाने के लिए अब हर घर से एक राम निकलेगाअन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैरावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैभ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगाअब हर घर से एक राम निकलेगामंगलमय हो दशहरा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!दशहरा एक उम्मीद जगाता है,बुराई के अंत की याद दिलाता है,जो चलता है सत्य की राह परवो विजय का प्रतीक बन जाता हैंदशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएंसत्य स्थापित करके, इस देश से बुराई को मिटाना होगा,आतंकी रावण का दहन करने आज फिर राम को आना होगा,आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍अधर्म पर धर्म की 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पंजाब*आप सभी को Happy Vijayadashamतीन लोग आपका नंबर मांग रहे हैं, मैंने नहीं दिया.वो दशहरा के दिन आयेंगे उनके नाम हैं…सुख..!!शांति..!!समृधि..!!हैप्पी विजयदशमी।विजयदशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीरामबुराई पर अच्छाई का प्रतीक हैं श्री रामदशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍

मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयदशमी भी कहा जाता है। 📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍 *बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संगरिया की टीम की तरफ से सभी को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं* 📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍 : बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है दशहरा शारदीय नवरात्रि के नौ दिन समाप्त होने के बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। दशहरा का यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयादशमी भी कहा जाता है। इस साल 15 अक्टूबर को यह त्योहार मनाया जाएगा। 📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍 दशहरे के दिन जगह-जगह पर मेले का आयोजन होता है, साथ ही रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले फूंके जाते हैं। असत्य पर सत्य की जीत के इस प्रतीक के दिन लोग अपने मित्रों, परिजनों और रिश्तेदारों को संदेश भेजकर शुभकामनाएं देते हैं। आप भी इन संदेशों के...

* बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड भारत सरकार द्वारा रजिस्ट्रेशन नंबर 202103419400050 का कार्यक्षेत्र संपूर्ण भारत आराजनैतिक संगठन है* (आए जुडे देश के हित के लिए) बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड संगठन से जुडने हेतु व्हाट्सएप करे। मोबाइल न० 9877264170 बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड का नीतिगत परिचयमहिला/पुरुष जुड़े ----का सदस्यता अभियान भारतवर्ष के सभी प्रदेशो,संभाग, जिलो,विधानसभा क्षेत्र, तहसील, स्तर पर जोर शोर से चलाया जा रहा है समाज के हितों के लिए आज ही हमसे जुड़े एक फोटो व आधार कार्ड की फ़ोटो हमे वाट्सप नम्बर पर सेन्ड कर दे।उपरोक्त जानकारी हम इसलिए माँग रहे हैं क्योंकि आपको मनोनयन पत्र देते समय आपकी details उसमे भरी जाती है ।हमारे मुख्य उद्देश्य👇👇👇👇👇👇👇👇👇🙏🏻 भारत सरकार द्वारा बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट रजिस्टर्ड संगठन है 🙏 बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट कानून केंद्र सरकार द्वारा संपूर्ण भारत में लागू करवाना1: देश में बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट सुरक्षा कानून लागू किया जाए2: देश के बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट को आयुष्मान कार्ड दिया जाए3: देशभर में बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट का टोल टैक्स फ्री किया जाए4: बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम ट्रस्ट के अच्छे बर्ताव रखने हेतु पुलिस को निर्देश जारी किया जाए5: ट्रस्ट संस्था पर लिखे गए फर्जी मुकदमों को वापस लिया जाए6: ट्रस्ट या संस्था पर मुकदमा लिखे जाने से पहले जिलाधिकारी से अनुमति लेने का प्रावधान बनाया जाए👍👍👍👍सभी साथी ध्यान दें यह सभी कानून 1 दिन में नहीं होंगे लेकिन हम सभी साथियों की एकता से एक दिन जरूर होंगे👍👍👍👍ट्रस्ट सुरक्षा परिषद फाउंडेशन रजिस्टर्ड के मुख्य उद्देश्य (1) रेप ,दहेज,कन्या भ्रूण हत्या,भ्रष्टाचार, इन घिनोने क्रत्य को जड़ से उखाड़ फेकना।(2)समाज के भारतीय बालाक एव बालिकाओ हेतु सिलाई कढाई ।(3)सामाज में व्यापत छुआ छूत ऊॅच नीच तथा जाति धर्म की वशमता को सामप्त के लिए व्यापक प्रचार व प्रसार करना (4)अधिकारों की जानकारी देना व विधिक सहायता के लिए शिविरो का आयोजन करना ।(5)समाज को साक्षर बनाने के लिए सर्वशिक्षा , शिक्षा गारन्टी योजना के बारे में लोगो का ज्ञान कराना व बौद्धक शिक्षा का ज्ञान कखना (6)शारीरिक तथा मानसिक रूप से अक्ष्म व्यक्तियो हेतु कल्याणकारी कार्यो का सम्पादन करना तथा इन लोगो के रहने के लिए निशुल्क आश्रम बनाना (7)संस्था के माध्यम से समस्त भारतीय के बालक एव बालिकओं हेतु शिक्षा के साथ साथ सरकार से अनुमति लेकर तकनीकि शिक्षा का ज्ञान करवाना व औद्योगिक क्षेत्र में विकास के कार्यो को करना ।{9}शाराब मादक पदार्थो का सेवन करने वालों की लत छुडाने के लिए सरकार के कार्यक्रमों के अनुसार नशा उन्मूलन एवं पुर्नवास केंद्र स्थापित करना व अवैध रूप से बिक रही शराब को बन्द करवाना(10)दहेज प्रथा अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का प्रयास करना (11)निर्धन तथा कमजोर वर्ग की बालिकाओं के लिए निशुल्क छात्रावास वाचानलय ।(12)आम जनता के उपयोग के लिए धमार्थ कम्प्यूनिटी हाल ,बरातघर, वृद्धआश्रम, बालआश्रम महिला आश्रम,अनाथालय, प्याऊ,धर्माथ डिस्पेन्सरीव,निःशुल्क स्टुडियो, रात्रि निवास,मूकबधिरो के कल्याण हेतु समरत कायक को प्रचार व प्रसार करना ।(13) कोई भी महिला अगर किसी भी समस्या या किसी से परेशान हे तो हमारी संस्था उसे 24, घन्टे के अन्दर महिला की समस्या का निराकरण करवाएगी ।और भी कई मुद्दे जिस पर हमारी संस्था काम करेगी 🙏🏻आई जुड़े देश हित के लिए 🙏🏻👩🏻‍⚕बहन बिटियो के सम्मान में बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संस्था रजिस्टर मैदान में राष्ट्रीय अध्यक्षवनिता कासनियां पंजाब

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, हाल दिल का तुझसे केह दिया तेरा काम जाने, मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने रंग दुनिया के मैं न समज पाती हु हस के माया में तेरी उलज जाती हु कैसे रखता है तू सब पे लगाम जाने मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने तुझको मंजूर जो जग में होता वही राज गेहरा हो कितना वो छुपता नही सिवा तेरे न किसी का कोई अंजाम जाने मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने छोड़ा जग तो प्रबु तेरा दर मिल गया इस दास को चरणों में घर मिल गया कैसे रखे गा तू भगतो का समान जाने मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने by समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब,